THE CONCISE ART OF CRAFTING A CONVERSATIONAL ARTICLE


द्देश्यपूर्ण जीवन के लिए प्रबल विश्वास और निष्ठा को ही हम व्रत मानते हैं। व्रत एक ऐसा आध्यात्मिक अनुष्ठान है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने अस्तित्व का समर्पण कर देता है।

वह अपने मन की समस्त बिखरी हुई स्थितियों को एक जगह केंद्रित करता है। इस एकाग्रता से ही उसके अंदर संकल्प का अंकुरण होता है।

इस अंकुरण को जब हृदय की संपूर्ण भावनाओं, संपूर्ण मानसिक ऊर्जा का खाद-पानी मिलता है तो संकल्पशक्ति आकार लेने लगती है जिसके द्वारा व्यक्ति एक बिंदु पर केंद्रित होने की शक्ति प्राप्त करता है और भटकाव से मुक्त हो जाता है।

जीवन का हर कर्म, जीवन की हर आकांक्षा व्रत हो सकती है यदि उसमें आत्म जागरूकता हो। इस तरह देखें तो आत्मबल को जगाने व साधने की क्रिया को हम व्रत की संज्ञा दे सकते हैं। यूं देखा जाए तो हर पल, हर दिन व्रत है। दिनचर्या का हर कर्म व्रत है।

अपनी वृत्तियों से लडऩा भी व्रत है। ध्यान साधना की गहराई में उतरना भी व्रत है। शास्त्रों में प्रकृति और निवृत्ति के अनुसार दो प्रकार के व्रत माने जाते हैं। जिस व्रत में केवल आंतरिक चेतना की भागीदारी होती है उसे निवृत्ति व्रत कहते हैं।

इस व्रत को साधक उपवास आदि द्वारा करता है, जबकि प्रवृत्ति मूलक व्रत में अन्य वस्तुओं जैसे द्रव्य, विशेष भोजन तथा पूजा-अनुष्ठान आदि का प्रयोग किया जाता है। धर्मशास्त्रों में कायिक और मानसिक व्रतों का उल्लेख भी मिलता है।

जिस व्रत में शारीरिक तप किया जाता है, शरीर की अशुद्धियों को जला-गलाकर कुंदन बनाया जाता है, वह शारीरिक व्रत कहलाता है। अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य तथा अस्तेय आदि मानस व्रत कहलाते हैं।

इनमें शारीरिक शक्तियों का जागरण होता है तथा इन्हें विशिष्ट कार्यों में नियोजित किया जाता है। व्रत को महातप का अंग भी माना जाता है। एक और जहां तप का प्रयोग हम अपनी ऊर्जा को नष्ट होने से बचाने के लिए करते हैं तो किसी महत्वपूर्ण उद्देश्य के लिए व्रतशील होते हैं।

व्रत विधानों का आधार बहुत ही विज्ञान सम्मत है। माना जाता है कि किसी तिथि विशेष के अंतर्गत स्थिति में जो ऊर्जा प्रवाहित होती है, उस ऊर्जा का अपने मानसिक संकल्प के लिए उपयोग करना व्रत का सबसे बड़ा रहस्य है।

अनियंत्रित आहार-विहार के कारण भी हम अनेक तरह की व्याधियों को आमंत्रित करते रहते हैं। व्रत अनुष्ठान इस आहार को इतना नियंत्रित व सरल बना देता है कि विकारों को शरीर में, मन में स्थान ही नहीं मिलता। व्रत के माध्यम से जो आध्यात्मिक उपलब्धियां प्राप्त होती हैं उनका सीधा अर्थ सदाचरण से होता है।

इसके द्वारा जो मानसिक शक्तियां विकसित होती हैं उनके कारण मन की भावना में न केवल संवेदनाओं का स्फुरण होता है, बल्कि उदात्त भावनाओं के कारण सृजनशील व्यक्तित्व का विकास भी होता है। अपनी श्रद्धा, निष्ठा और विश्वास को केंद्रित करके उच्च उद्देश्य में लगाने का संकल्प जागृत होता है।

एथेंस ओलिंपिक में हिस्सा लेने जा रहा सात सदस्यीय भारतीय कुश्ती दल वहां पहुंचने से पहले बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में 10 दिन तक प्रशिक्षण लेगा।

उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत और केंद्रीय खेल मंत्री सुनील दत्त ने दल के सदस्यों को आज गुरूवार रात बुल्गारिया रवाना होने से पहले ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामना दी।

पहलवानों के रवाना होने से पहले यहां एक कार्यक्रम के दौरान टीम के मुख्य कोच जगमिंदर सिंह ने कहा कि शिलारू और पटियाला में हमारा प्रशिक्षण काफी अच्छा रहा और 13 अगस्त से होने वाले ओलिंपिक के लिए लडक़ों की तैयारी काफी अच्छी है।

भारत की ओर से फ्री स्टाइल वर्ग में योगेश्वर दत्त (55 किग्रा), सुशील कुमार (60 किग्रा), रमेश कुमार (66 किग्रा), सुजीत मान (74 किग्रा), अनुज कुमार (84 किग्रा) व पलविंदर सिंह चीमा (120 किग्रा) तथा ग्रीको रोमन वर्ग में मुकेश खत्री (55 किग्रा) एथेंस ओलिंपिक में भाग लेंगे।

टीम की संभावनाओं और मुख्य प्रतिद्वंद्वियों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि लाइटवेट वर्ग में कोरिया और जापान के पहलवान कड़ी टक्कर देंगे। बाकी वर्र्गों में रूस के पहलवान मुख्य प्रतिद्वंद्वी होंगे। भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष डा. महेंद्र सिंह मलिक ने दावा किया कि भारत को एथेंस में पहलवान ही पदक दिलाएंगे।

मलिक ने कहा कि सोफिया में खिलाडिय़ों को अच्छा प्रशिक्षण मिलेगा और वहां का मौसम तथा जलवायु एथेंस की तरह है। इससे पहलवानों को अनुकूलन में मदद मिलेगी, इसीलिए वहां 10 दिन का प्रशिक्षण व अनुकूलन कार्यक्रम रखा गया है।

कुश्ती ताकत का खेल है, इसलिए इसमें चोट जल्दी आती है और पहलवान तनाव में भी जल्दी आता है। इस कारण से इस खेल में चिकित्सा तथा खेल मनोविज्ञानी की आवश्यकता है। कुश्ती में आधारभूत सुविधाओं की कमी है, साथ ही पहलवानों को अच्छे कोच दिए जाने चाहिए।

उन्होंने पहलवानों के लिए पुनर्वास तथा बीमा इत्यादि की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की। कुश्ती महासंघ ने ओलिंपिक में भाग लेने वाले प्रत्येक पहलवान के लिए 1000 डॉलर की राशि उपलब्ध कराई है।

राष्ट्रीय चयन समिति ने 10 से 25 सितंबर तक इंग्लैंड में होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की 14 सदस्यीय टीम में आज गुरु वार को तमिलनाडु के विकेटकीपर-बल्लेबाज दिनेश कार्तिक का चयन करते हुए सभी को चौंका दिया।

चयनकर्ताओं ने विकेटकीपर पार्थिव पटेल के साथ ही फिटनेस को लेकर संघर्षरत बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जहीर खान को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। मध्यम तेज गेंदबाज अजित आगरकर की जहीर खान के स्थान पर टीम में वापसी हुई है, जबकि महान बल्लेबाज सुनील गावसकर के बेटे रोहन को 21 अगस्त से एम्सटर्डम में होने वाली त्रिकोणीय शृंखला के लिए चुना गया है।

इस टूर्नामेंट में भारत को पाकिस्तान व वल्र्ड चैंपियन ऑस्टे्रलिया से खेलना होगा। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव एस. के. नायर ने चयन समिति की बैठक के बाद टीम की घोषणा करते हुए बताया कि रोहन के अलावा 14 सदस्यीय टीम चैंपियंस ट्रॉफी के लिए इंग्लैंड जाएगी।

सैयद किरमानी की अध्यक्षता में तीन घंटे चली चयन समिति की बैठक में कप्तान सौरव गांगुली व कोच जॉन राइट भी उपस्थित थे। जहीर को चोट से उबरने का समय देने के लिए टीम से बाहर रखा गया है। टीम 17 अगस्त को हॉलैंड के लिए रवाना होगी और उससे पहले किसी तैयारी शिविर का आयोजन नहीं किया जाएगा।

नायर ने बताया कि टीम के फीजियो एंड्रयू लीपस ने जहीर को विश्राम देने की सलाह दी है, ताकि वो पूरी तरह फिट होकर पहले जैसा प्रदर्शन कर सके। उनकी सलाह मानकर ही जहीर को टीम से बाहर रखा गया है। एम्सटर्डम टूर्नामेंट के बाद टीम इंग्लैंड जाएगी और वहां एक से पांच सितंबर तक मेजबान टीम के खिलाफ तीन वनडे मैचों की नेटवेस्ट चैलेंज शृंखला खेलेगी।

नायर ने बताया कि चयनकर्ताओं ने बिहार के महेंद्र सिंह धोनी के नाम पर भी विचार किया था, लेकिन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद दिनेश को मौका देने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि हमने घरेलू और भारत-ए टीम के स्तर पर दोनों खिलाडिय़ों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया और दिनेश कार्तिक इस मामले में बेहतर साबित हुआ।

ऑल राउंडर हेमांग बदानी के बारे में पूछे जाने पर नायर ने कहा कि बदानी के नाम पर विचार करने की बात सोची गई थी, लेकिन वह अभी अपने टखने की चोट का इलाज करा रहा है। उसकी चोट हालांकि ज्यादा गंभीर नहीं है, लेकिन हम किसी तरह का खतरा नहीं लेना चाहते थे, इसलिए उसके नाम पर विचार नहीं किया गया।

आगरकर को काउंटी में अच्छे प्रदर्शन का फायदा मिला। आगरकर ने मिडिलसेक्स की ओर से ग्लूस्टरशायर के खिलाफ चल रहे काउंटी मैच में पांच विकेट लिए हैं।

बोर्ड सचिव ने बताया कि मध्यक्रम के बल्लेबाज दिनेश मोंगिया के नाम पर भी चर्चा की गई, क्योंकि काउंटी में वह बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और बड़ी पारियां खेल रहा है, लेकिन रोहन को ऑल राउंडर होने का फायदा मिला।

बैठक से पहले बोर्ड अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने गांगुली और राइट के साथ एक घंटे तक बातचीत भी की। किरमानी ने पिछले दिनों गांगुली की कप्तानी की आलोचना की थी, लेकिन नायर ने यह बताने से इनकार कर दिया कि बैठक के दौरान इस मसले पर चर्चा हुई या नहीं।

19 वर्षीय कार्तिक को घरेलू क्रिकेट के साथ ही भारत-ए की ओर से लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण टीम में जगह मिली है। उन्होंने पिछले साल बांग्लादेश में खेले गए अंडर-19 विश्व कप में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में प्रभावी प्रदर्शन किया था।

तमिलनाडु के इस क्रिकेटर ने रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल व फाइनल में शतक जमाए थे और 13 प्रथम श्रेणी मैचों में 45.70 की औसत से 777 रन बनाए थे।

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