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भारत के धुरंधर शूटर मनशेर सिंह को विश्वास है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए एथेंस ओलंपिक गेम्स में मैडल हासिल करना उनके लिए असंभव नहीं होगा। सिडनी ओलंपिक 2000 में रजत पदक विजेता रहे मार्क रसेल को कोच बनाने के बाद से तो मनशेर के प्रदर्शन में हैरतअंगेज सुधार हुआ है।

उनके अलावा राज्यवर्धन राठौड़, अभिनव बिंद्रा और अंजलि भागवत वेदपाठक से भी मैडल की उम्मीद लगाई जा रही है। मनशेर ने एथेंस रवाना होने से पहले कहा कि भारतीय और इटली या अमेरिका के शूटर्स में में फर्क सिर्फ उनके नजरिए का है।

हम अपनी तैयारी देर से शुरू करने के बावजूद उनके करीब पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने तैयारी मई में शुरू की थी। तब से लगातार अच्छे प्रदर्शन से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं उम्मीद करता हूं कि ओलंपिक तक मेरा यह फॉर्म बरकरार रहेगा।

मनशेर एथेंस में हवा के बहाव को लेकर थोड़े चिंतित दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वहां की गर्मी और हवा का निशानेबाजों के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। हम गर्मी के तो अभ्यस्त हैैं, लेकिन हवा के कारण हमें ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

हाल ही में बैंकॉक में एशियन क्ले शूटिंग चैैंपियनशिप में मनशेर ने व्यक्तिगत और टीम दोनों स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने पिछले माह चेक मास्टर्स में भी गोल्ड मैडल जीतने में कामयाबी हासिल की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेरा सर्वŸोष्ठ स्कोर 145 रहा है ।

इस लिहाज से मैं चोटी के अन्य निशानेबाजों को टक्कर देने की स्थिति में हूं। वास्तव में मनशेर ने कुआलालम्पुर में एशियन चैैंपियनशिप में 144, बैैंकॉक में 143 और चेक मास्टर्स में 144 का स्कोर बनाया था।

अभिनश्याम को किस्मत का सहारा

नई दिल्ली । अभिन्नश्याम गुप्ता को पता है कि उसके लिए ओलिंपिक का दरवाजा किस्मत से ही खुला है। इस बैडमिंटन खिलाड़ी को उम्मीद है कि किस्मत एक बार फिर मेहरबान रही, तो वह एथेंस में शीर्ष 16 खिलाडिय़ों में जगह बना लेगा।

अभिन्न के अलावा राष्ट्रीय महिला चैंपियन अपर्णा पोपट और निखिल कानिटकर ने भी ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया है। अभिन्न ने यहां कहा कि काफी कुछ ड्रॉ पर निर्भर करेगा। शुरुआती मैचों में बड़े खिलाडिय़ों के सामने उतरने से बच गया तो काफी सहूलियत होगी।

ड्रॉ अच्छा रहा, तो मैं शीर्ष 16 खिलाडिय़ों में पहुंच सकता हूं। एथेेंस ओलिंपिक में शीर्ष 42 बैडमिंटन खिलाडिय़ों को सीधे प्रवेश दिया गया है। अभिन्न का स्थान 44वां है और वह रिजर्व खिलाडिय़ों की लिस्ट में भी दूसरे नंबर पर था, लेकिन कनाडा के बॉब मिलराय के हट जाने से उसे एथेंस जाने का मौका मिल गया।

इलाहाबाद के इस खिलाड़ी ने कहा कि एथेंस ओलिंपिक में प्रवेश की जानकारी पहले मिल जाती, तो बेहतर होता। मैं ऐसे में मलेशिया में मिसबुन सेदक से प्रशिक्षण ले सकता था। ऐसा नहीं हो पाने के बावजूद मैंने अपनी ओर से पूरी तैयारी की है।

दो बार के राष्ट्रीय चैंपियन अभिन्न पिछले अक्टूबर में जर्मन ओपन के प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। इस साल अप्रैल में उन्होंने मॉरीशस ओपन जीता और एशियाई चैंपियनशिप में प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे। अभिन्न की मुख्य चिंता चीन और कोरिया के खिलाडिय़ों को लेकर है।

उन्होंने कहा कि चीन और कोरिया के खिलाड़ी स्वर्ण पदकों के सबसे मजबूत दावेदार होंगे। उनमें गजब की रफ्तार और ताकत है। मैंने बेंगलूर में विमल कुमार की देखरेख में कड़ी मेहनत की है और मुझे विश्वास है कि मैं अपनी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा।

असफलता के लंबे दौर से गुजर रहे भारतीय टीम के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग जयपुर में एक विज्ञापन शूटिंग के सिलसिले में आए हुए हंै। असफलता के बारे में उनका कहना है कि यह तो सिर्फ क्रिकेट की अनिश्चितता की वजह से हुआ, मेरी तकनीक कोई में खामी नहीं है। वीरेंद्र सहवाग से भास्कर की संक्षिप्त बातचीत के अंश:

प्र. एशिया कप की असफलता का असर क्या आगामी दौरों व शृंखलाओं पर भी पड़ेगा?
उ. यह सही है कि एशिया कप में हम खराब खेले, लेकिन इसमें ऐसी कोई बात नहीं है कि आगामी दौरों पर इसका असर पड़े। एशिया कप से लौटते ही सभी खिलाड़ी अपने-अपने घर गए हुए हैं, सब आराम कर रहे हैैं। अब जब दोबारा टीम इकट्ठी होगी, तब ही एशिया कप की खामियों के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे और आगामी कार्यक्रमों के बारे में बात होगी। गलतियों को सुधारने के प्रयास करेंगे।

प्र. इन दिनों आप अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं, बल्लेबाजी नहीं चल पा रही है।
उ. ऐसा हो जाता है। मैैं अपनी तरफ से रन बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ता, लेकिन कई बार जल्दी आउट हो जाता हूं।

प्र. असफलता का दौर कुछ ज्यादा लंबा नहीं हो गया?
उ. नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। एशिया कप में मैैंने एक अच्छी पारी भी खेली थी, लेकिन फाइनल में अच्छा नहीं खेल सका। मेरे से पहले भी विश्व के कई नामी खिलाड़ी असफलता के इससे लंबे दौर से गुजर चुके हैं। कुछ पारियों में असफल हो जाना चिंता का विषय नहीं है।

प्र. असफलता को आप आत्मविश्वास की कमी मानते हैं?
उ. नहीं, आत्मविश्वास कतई लूज नहीं हुआ है। एक शृंखला खराब खेलने से कुछ फर्क नहीं पड़ता। कैरियर में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं।
प्र. शादी से प्रदर्शन पर कुछ फर्क पड़ा?
उ. नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ा।

महेला जयवर्धने का दोहरा शतक

गाले । महेला जयवर्धने (237) के दोहरे शतक और चामिंडा वास (69) की उम्दा बल्लेबाजी की बदौलत श्रीलंका ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट मैच की पहली पारी में 486 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफलता प्राप्त की।

जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में दूसरे दिन की समाप्ति तक बगैर किसी नुकसान के 82 रन बना लिए थे। स्टंप के समय डिपेनार 46 और जार्सवेल्ड 30 रन बनाकर विकेट पर थे। कल के नाबाद बल्लेबाज जयवर्धने ने द. अफ्रीका के किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा और बेहतर तकनीक तथा एकाग्रता की नुमाइश करते हुए बेदाग पारी खेली।

वास ने एक बार फिर बल्ले की चमक दिखाते हुए उनका भरपूर साथ दिया और विपक्षी खेमे को सफलता के लिए तरसा दिया। जब जयवर्धने 190 रन पर थे तब तो दक्षिण अफ्रीकी फील्डरों ने उनके खिलाफ कैच की जोरदार अपील की।

उनका कहना था कि गेंद जयवर्धने के दस्तानों से लगकर फील्डर के हाथों में गई है लेकिन टीवी रिप्ले देखने के बाद उन्हें नाटआउट करार दिया गया। इस बीच वास 69 रन बनाने के बाद स्पिनर निकी बोए का शिकार बने। बोए की गेंद पर मिडआफ में हेवार्ड ने दूसरे प्रयास में वास का कैच पकड़ लिया। वास ने 142 गेंद खेली और 10 चौके लगाए।

इस बीच जयवर्धने ने बोए की गेंद पर चौका लगाया और दो गेंद बाद जबरदस्त छक्का जडक़र उन्होंने अपना दोहरा शतक पूरा किया। जयवर्धने की साढ़े आठ घंटे की मैराथन पारी चाय से कुछ पहले खत्म हुई जब हेवार्ड ने उन्हें पगबाधा आउट किया।

जयवर्धने ने आउट होने से पहले 415 गेंदों का सामना कर 237 रन बनाए। इसमें 25 चौके व तीन छक्के शामिल थे। जयवर्धने की वापसी के बाद नए बल्लेबाज मुथैया मुरलीधरन भी नहीं रूके और हेवार्ड ने उनका खाता खुलने से पहले ही गिल्लियां बिखेर दीं। शान पोलाक ने 48 रन देकर चार और हेवार्ड ने 81 रन देकर तीन विकेट लिए।

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