How to Become a Successful Worker

जॉब मिलने के साथ ही एक नई चुनौती शुरू हो जाती है। यह चुनौती होती है वहां टिके रहने की, नई जिम्मेदारियों से कुशलतापूर्वक निपटने की और साथ ही बॉस की उम्मीदों पर खरा उतरने की। शुरुआत में थोड़ा बहुत मौका मिलता है जब आपके प्रति स्टाफ से लेकर बॉस तक का रवैया सहयोगात्मक रहता है। ऐसे में समय के सदुपयोग की जरूरत होती है। आपका लक्ष्य जल्दी से जल्दी ऑफिस के माहौल को समझना और गलतियों पर काबू पाना होना चाहिए। काम के शुरुआती दौर में यह उस नींव का काम करेगी जो उस संस्था में आपके भविष्य के लिए निर्णायक होगी। इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखकर शुरुआती कठिनाइयों से पार पाने में सफलता मिल सकती है।

अपेक्षाएं : यह समझना सबसे जरूरी है कि कंपनी ने आपको यह काम क्यों दिया है? कंपनी और बॉस की अपेक्षाओं को अच्छी तरह से समझ लेने के बाद काम करने में सुविधा हो जाएगी। इस दौरान यह भी ध्यान रखें कि निश्चचित समय सीमा के भीतर ही कार्य किया जाना है। किसी भी काम का महत्व तभी है जब वह तय समय सीमा के भीतर ही पूरा हो।

लाएं बदलाव : जितना जल्दी हो सके, खुद में संस्थान के अनुरूप बदलाव लाने की कोशिश करें। वहां की कार्य संस्कृति को समझें और मैनेजमेंट की कार्य शैली से सामंजस्य बिठाएं ताकि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में ज्यादा समय न लगे।

बॉस के विश्वासपात्र बनें : बॉस का लंबा अनुभव आपके लिए एक पूंजी साबित हो सकता है इसलिए उनके साथ आवश्यकतानुसार संवाद स्थापित करते रहें। किसी प्रोजेक्ट से संबंधित सफलताएं, कठिनाइयां, कार्य की प्रगति आदि से उन्हें अवगत कराते रहने से संबंधों में ताजगी बनी रहती है। इससे उनका सहयोग भी लगातार मिलता रहेगा। काम के दौरान ध्यान रखें कि आप सिर्फ किसी संस्थान के एक भाग हैं और कोई भी सफलता टीम वर्क का परिणाम होती है।

जिम्मेदारियां स्वीकारें : जिम्मेदारियों से कभी मुंह न मोड़ें। आत्मविश्वास के साथ इनका सामना करें। यदि आपको सफलता का श्रेय मिलता है तो नाकामियों की जिम्मेदारी भी आपको ही लेनी पड़ेगी। आरोप-प्रत्यारोप से छवि खराब होती है।

रखें पद की गरिमा : अपने पद की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास करें। सिर्फ आपका प्रदर्शन व संस्थान के प्रति निष्ठा महत्वपूर्ण रह जाती है। संस्थान या किसी सीनियर की पीठ पीछे बुराई करके आप स्वयं को ही नीचा दिखाते हैं। हो सकता है कम योग्यता व क्षमता वाले लोग आपसे उच्च पदों पर आसीन हों पर इससे ईष्र्या की बजाय अपना ध्यान प्रदर्शन सुधारने पर लगाएं।

नीतियों का पालन करें : कंपनी की नीतियों की जानकारी रखें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कहीं काम कंपनी की सीमाओं के बाहर या उसके खिलाफ न हो। ये सभी बातें नौकरी को स्थायी रखने के साथ ही मिलने वाली अन्य सुविधाओं जैसे प्रमोशन आदि दिलाने में भी सहायक हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *