Career in Graphic Designing

ज्यादातर व्यक्ति बने बनाए सांचों में ढल जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो नए सांचे बनाने की क्षमता रखते हैं और उनमें दुनिया ढलती है। डिजाइनिंग का क्षेत्र इसी तरह के लोगों के लिए है।

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं-पहले वे जो बने बनाए ट्रेंड्स पर चलते हैं और दूसरे जो नए ट्रेंड्स गढ़ने में यकीन रखते हैं। डिजाइनिंग का क्षेत्र इन्हीं दूसरी तरह के व्यक्तियों के लिए है। यह ऐसे लोगों के लिए है जो कुछ नया सृजित करने की इच्छा रखते हैं। असल में यह क्षेत्र इतना व्यापक है कि हमारे जीवन के लगभग हर पहलू में इसका दखल है। आपके कपड़ों और गहनों से लेकर जूतों तक तथा आधुनिक ऑफिसों से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों तक सभी चीजों के पीछे किसी न किसी डिजाइनर का अमूल्य योगदान होता है। 6 प्रतिशत की सालाना विकास दर के साथ भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। दुनिया की तकरीबन सभी बड़ी कंपनियां इस विशाल बाजार में हिस्सेदारी चाहती हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि उनके द्वारा पेश किए जाने वाले प्रोडक्ट्स में कुछ नयापन हो। लगातार नयेपन की इसी आवश्यकता ने डिजाइनिंग को वर्तमान में कैरियर के लिए एक आकर्षक क्षेत्र बना दिया है।

किसी भी नए डिजाइन के अस्तित्व में आने के लिए यह आवश्यक है कि पहले यह निश्चित किया जाए कि उसके अनुसार बनने वाले प्रोडक्ट की आवश्यकता किसे है। जाहिर है कि कोई भी प्रोडक्ट उपभोक्ता की पसंद और आवश्यकता के अनुसार ही डिजाइन किया जाता है। डिजाइन तैयार करते हुए सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि उसकी मूलभूत विशेषताएं कैसी होंगी। इनमें साइज, आकार, वजन, रंग, मैटीरियल, कीमत, सुरक्षा आदि जैसी चीजें शामिल हैं। अगला चरण होता है स्केच तैयार करने का। यह काम हाथ से भी किया जाता है और कंप्यूटर से भी। क्लाइंट से जानकारी लेने के बाद डिजाइनरों की टीम प्रोडक्ट का एक विस्तृत डिजाइन बनाती है। यह कागज पर रेखाचित्रों यानी ड्राइंग्स के रूप में भी हो सकता है और कंप्यूटर मॉडल के रूप में भी। आजकल इस कार्य के लिए ज्यादातर डिजाइनर कंप्यूटर एडेड डिजाइन (केड) टूल्स की मदद लेते हैं। इससे उन्हें एक साथ ही कई विकल्पों पर काम करने की सुविधा हो जाती है। इसके फलस्वरूप कार्य में लचीलापन भी आता है और पैसे व समय की भी बचत होती है।
डिजाइनिंग का क्षेत्र अति विस्तृत है। अधिकांश डिजाइनर किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। आइए इन क्षेत्रों पर सिलसिलेवार नजर डालते हैं।

ग्राफिक डिजाइनिंग
अगर आप डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं और मीडिया क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं तो ग्राफिक डिजाइनिंग का क्षेत्र आपके लिए ही है। ग्राफिक डिजाइनर अखबार, पत्रिकाओं, एडरवरटाइजिंग एजेंसियों,प्रिंटिंग कंपनियों आदि में काम करते हैं। उनका कार्य लेआउट और जरूरत के अनुसार प्रोडक्शन डिजाइन्स तैयार करना होता है। वे प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देने के लिए ब्रॉशर भी डिजाइन करते हैं। टेलीविजन पर किसी कार्यक्रम के शुरू और आखिर में जो क्रेडिट्स आते हैं उन्हें भी ग्राफिक डिजाइनर द्वारा ही तैयार किया जाता है। इस क्षेत्र में आप आर्ट डायरेक्टर, लेआउट आर्टिस्ट, कंप्यूटर आर्टिस्ट आदि जैसे पदों पर कार्य कर सकते हैं।

इंटीरियर डिजाइनिंग
जैसा कि नाम से जाहिर है इंटीरियर डिजाइनर का कार्य क्लाइंट की आवश्यकतानुसार उपलब्ध स्थान का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल करना है। इसमें भी विशेषज्ञता के अलग-अलग क्षेत्र होते हैं। आप बिजनेस डिजाइनिंग (थिएटर, आर्ट गैलरीज, ऑफिस) या फिर रेजीडेंशियल डिजाइनिंग में विशेषज्ञता ले सकते हैं। कुछ लोग कमरा विशेष जैसे कि किचन या बाथरूम की इंटीरियर डिजाइनिंग में भी विशेषज्ञता हासिल कर लेते हैं। आजकल वास्तु या फेंगशुई पर आधारित इंटीरियर डिजाइनिंग का भी चलन बढ़ रहा है।

ज्वेलरी डिजाइनिंग
गहने हमेशा से हमारी परंपरा का हिस्सा रहे हैं। आज विश्व में सबसे ज्यादा सोने की खपत भारत में होती है। साथ ही भारत हीरों की कटाई का भी प्रमुख केंद्र है। ज्वेलरी डिजाइनर का कार्य ज्वेलरी के आकर्षक डिजाइन तैयार करना होता है। नोएडा स्थित ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीटयूट के चेयरमैन बी के नरूला के अनुसार इसके लिए आवश्यकता होती है, कंज्यूमर के टेस्ट को पहचानने की तथा फिर अपनी क्रिएटिविटी का उपयोग कर उनकी रुचि के अनुसार गहने डिजाइन करने की। बाजार में बड़ी कंपनियों के कूदने तथा उद्योग के संगठित रूप लेने की वजह से इस क्षेत्र में डिजाइनरों की मांग बढ़ती जा रही है।

फैशन डिजाइनिंग
हर कोई दूसरों से अलग और अच्छा दिखना चाहता है। अब इसके लिए कपड़ों से बेहतर भला कौन सी चीज हो सकती है। फैशन डिजाइनर का कार्य कपड़े व एसेसरीज को कुछ इसी तरह से डिजाइन करना है। फैशन डिजाइनिंग में अलग-अलग तरह के कपड़ों तथा पैटर्न पर काम करना होता है। इसके लिए आवश्यक है कि आपमें तकनीकी समझ और क्रिएटिविटी दोनों का ही मेल हो। अपेरेल इंडस्ट्री में रोजगार की संभावनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। कुछ बड़े फैशन डिजाइनर स्वतंत्र रूप से भी कार्य करते हैं जबकि कुछ हाई फैशन डिपार्टमेंटल स्टोर्स के साथ जुड़ जाते हैं।

टैक्सटाइल डिजाइनिंग
आपके घर की बैडशीट्स, परदे और ऐसी कई तरह की फर्निशिंग्स की सुंदरता मुख्य रूप से किसी टेक्सटाइल डिजाइनर की कल्पनाशीलता व हुनर पर निर्भर करती है। वह यह तय करता है कि किसी फैब्रिक के लिए किस तरह का प्रिंट और डिजाइन सही रहेगा। टेक्सटाइल डिजाइनर टेक्सटाइल मिलों, डिजाइन स्टूडियो तथा एक्सपोर्ट हाउसेज में कार्य करते हैं। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए क्रिएटिविटी के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आपकी रंग विश्लेषण क्षमता अच्छी हो। फर्निशिंग और अपेरेल सेक्टर में अच्छे उछाल के चलते इस क्षेत्र में भविष्य के लिए काफी संभावनाएं हैं।

इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग
इसे कॉमर्शियल डिजाइनिंग भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत प्रोडक्ट्स की एक व्यापक श्रृंखला शामिल है जिसमें हवाई जहाज, कार, घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, फर्नीचर, खिलौने, विभिन्न उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें आदि शामिल हैं। इंड्रस्ट्रियल डिजाइनर संबद्ध उद्योगों में सक्रिय कंपनियों के डिजाइन डिपार्टमेंट में कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य यह होता है कि प्रोडक्ट पहले से भी बेहतरीन और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इसके लिए क्रिएटिविटी के साथ इंजीनियरिंग, मैन्यूफैक्चरिंग प्रोसेस तथा बाजार की स्थितियों की भी जानकारी आवश्यक है।

फुटवियर डिजाइनिंग
अगर आप भीड़ में हों तथा अपने आसपास खड़े लोगों के जूतों पर नजर डालें तो आप को अंदाजा हो जाएगा कि जूतों के डिजाइनों में भी कितनी विविधता हो सकती है। भागने के लिए रनिंग शूज, नाचने के लिए डांसिंग शूज, खेलने-कूदने के लिए स्पो‌र्ट्स शूज और ऑफिस जाने के लिए फॉर्मल शूज, यानी जितने काम उतनी ही तरह के जूते। जैसा कि नोएडा स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीटयट के टेक्निकल डायरेक्टर वी बी परवतिकर कहते हैं, फुटवियर डिजाइनर के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उसके द्वारा डिजाइन किया गया फुटवियर कलात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हो। उसका कार्य फैशन, मौसम और लोगों की अलग-अलग आवश्यकताओं के हिसाब से जूतों के मौलिक डिजाइन तैयार करना होता है। इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूता उत्पादन के क्षेत्र में भारत चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा देश है।
उपरोक्त सभी क्षेत्रों में विभिन्न संस्थानों द्वारा अलग-अलग अवधि वाले डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा, डिग्री, शार्ट टर्म व सर्टिफिकेट कोर्सेज संचालित किए जाते हैं।

संस्थान एवं कोर्स
सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग सेंटर
सी-41 ,इंडस्ट्रियल एरिया, सिकंदरा, आगरा फोन-0562-2642994, वेबसाइट www.cftiagra.com
( फुटवियर टेक्नोलॉजी में एडवांस कोर्स)
फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीटयूट
ए-10, सेक्टर-24, नोएडा, फोन- 2412558, ई मेल-fddi@vsnl.com
(पीजी डिप्लोमा इन फुटवियर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट)
सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग सेंटर
जीएसटी रोड, चेन्नई, तमिलनाडु फोन-091-044-2341529,ई-मेल-cfti@md 5.vsnl.net
( एडवांस कोर्स इन फुटवियर टेक्नोलॉजी)
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी
हौज खास, नई दिल्ली फोन-26965080, सेक्टर-3, साल्ट लेक, कोलकाता फोन-3355734 वेबसाइट-www.niftindia.com
( फैशन एंड अपेरेल, टेक्सटाइल डिजाइन)
सेंटर फॉर इनवायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी रोड, नवरंगपुरा, अहमदाबाद फोन- 079 – 26442470 ई मेल ump@ait.ac.th
(इंटीरियर डिजाइनिंग में पांच साल का प्रोफेशनल कोर्स)
पर्ल एकेडेमी ऑफ फैशन
ए – 21/13, नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-2, नई दिल्ली फोन-51417693, ईमेल-counsellor@pearl academy.com
(फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट तथा टेक्सटाइल व ज्वेलरी डिजाइन में ग्रेजुएट कोर्सेज)
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फैशन डिजाइन,हौज खास इन्क्लेव, हौज खास, नई दिल्ली,फोन-6531846 ईमेल-nifd_hauzkhas@indiatimes.com
(फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन व इंटीरियर डिजाइन में एडवांस डिप्लोमा व डिप्लोमा कोर्सेज)
ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीटयूट
ए-89, सेक्टर-2, नोएडा फोन-2540571, वेबसाइट- www.jdtiindia.com
(ज्वेलरी डिजाइनिंग में शॉर्ट टर्म, सर्टिफिकेट व स्पेशलाइज्ड कोर्सेज)
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ डिजाइन
पालदी, अहमदाबाद फोन-079-26639462ई मेल-academic@nid.edu
(विजुअल कम्यूनिकेशन, इंड्रस्ट्रियल डिजाइन और टेक्सटाइल व अपेरेल डिजाइन में चार वर्षीय कोर्सेज)
जे डी इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी
हौज खास विलेज, नई दिल्ली, फोन-26964151

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