बढ़ाएं स्कोर पाएं सफलता

जुहेर बिन सगीर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद एक कॉलेज में अध्यापन कर रहे थे, लेकिन चूंकि उनका सपना आईएएस बनने का था, इसलिए कुछ ही समय बाद उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़ सिविल सेवा परीक्षा (2004) की तैयारी आरंभ कर दी। अध्ययन के प्रति बेहद गंभीर और कॉन्फिडेंट श्री सगीर ने प्रारंभिक परीक्षा में इंजीनियरिंग की बजाय अपनी रुचि का और स्कोरिंग विषय भूगोल चुना था, जिसके साथ पीटी पास करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई। पीटी का रिजल्ट निकलने के बाद मु&प्त65533;य परीक्षा होने में महज दो-सवा दो माह का वक्त बचा था। मु&प्त65533;य परीक्षा में सगीर ने वैकल्पिक विषय के रूप में भूगोल और लोक प्रशासन लिया था। शुरू से साइंस के स्टूडेंट रहे सगीर मु&प्त65533;य परीक्षा के प्रति कॉन्फिडेंट तो थे, पर इन विषयों के साथ उनकी ल&प्त65533;बी तैयारी नहीं थी। इसका खामियाजा उन्हें मु&प्त65533;य परीक्षा

जिस तरह अर्जुन ने मछली की आंख को अपना लक्ष्य निर्धारित किया था, उसी तरह ईश्वर में आस्था व खुद पर विश्वास रखते हुए सकारात्मक रुख के साथ लक्ष्य की प्राप्ति में जुट जाएं। अनुशासन, त्याग और समर्पण भाव से की गई मेहनत सफलता अवश्य दिलाएगी। मोना पुरुथी (प्रथम स्थान) सिविल सेवा परीक्षा-2005

में असफलता के रूप में भुगतना पड़ा। इस गलती को महसूस करते हुए उन्होंने अगली बार शुरू से ही इन दोनों विषयों पर अपनी पकड़ बनाई। फलत: उन्होंने इन विषयों के साथ मु&प्त65533;य परीक्षा में जबरदस्त स्कोर किया। इंटरव्यू के बाद जब फाइनल रिजल्ट निकला, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। ऐसा होना स्वाभाविक भी था, क्योंकि उन्होंने टॉप टेन में जगह बनाते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। आज वे मसूरी स्थित लाल बहादुर भारतीय प्रशासनिक संस्थान में आईएएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
ग्लैमर सिविल सेवा का
उपर्युक्त सच्ची घटना का उल्लेख सिविल सेवा मु&प्त65533;य परीक्षा में अंकों का महत्व साबित करने के लिए किया गया है। आज भी सिविल सेवा का क्रेज और ग्लैमर युवाओं के सर चढ़कर बोलता है। आईटी और मैनेजमेंट से जुड़ी नौकरियों की चकाचौंध में आज भी अधिकांश प्रतिभाशाली युवाओं का सपना आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या अन्य समकक्ष कैडर के ऑफिसर के रूप में सिविल सेवा का अंग बनना होता है। जैसाकि आप सब जानते हैं सिविल सेवा देश की सर्वोच्च ब्यूरोक्रेट सेवा है, जिसके अधिकारी जिले से लेकर राज्य की राजधानियों और केंद्र सरकार के सर्वोच्च पदों पर आसीन होकर देश के कानून और प्रशासन की दिशा तय करते और उस पर नियंत्रण रखते हैं।
परीक्षा की प्रक्रिया
इस सेवा में शामिल होने के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना होता है, जिसके तीन चरण होते हैं-प्रारंभिक परीक्षा, मु&प्त65533;य परीक्षा और इंटरव्यू। प्रारंभिक परीक्षा स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिसका मकसद अगंभीर अ&प्त65533;यर्थियों की छंटनी करना होता है। इस परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होते हैं-सामान्य अध्ययन का अनिवार्य प्रश्नपत्र (150 अंक का) और अ&प्त65533;यर्थी द्वारा चुने गए एक वैकल्पिक विषय का एक प्रश्नपत्र (300 अंक का)। दोनों पेपर ऑब्जेक्टिव होते हैं।
महत्व मु&प्त65533;य परीक्षा का
सिविल सेवा में अपनी योग्यता व प्रतिभा साबित करने की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होती है-मु&प्त65533;य परीक्षा। इसमें अनिवार्य और वैकल्पिक मिलाकर कुल नौ विषयों की परीक्षा देनी होती है। सभी प्रश्नपत्र निबंधात्मक प्रकार के प्रश्नों पर आधारित होते हैं और सभी के लिए तीन घंटे की अवधि होती है। सामान्य हिन्दी (या कोई अन्य भारतीय भाषा) और सामान्य अंग्रेजी के पेपर (दोनों 300-300 अंक के) केवल क्वालिफाइंग नेचर के होते हैं, यानी इसमें केवल आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक पाना होता है। इसके अंक मेरिट लिस्ट बनाते समय नहीं जोड़े। इसके बाद शुरू होता है अंकों का असली खेल, जिसमें अनिवार्य विषय के तहत निबंध का एक प्रश्नपत्र (200 अंक का) और सामान्य अध्ययन के दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक 300 अंक का) तथा अ&प्त65533;यर्थी द्वारा चुने गए दो वैकल्पिक विषयों के दो-दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 अंक का) शामिल होते हैं। मु&प्त65533;य परीक्षा के बाद 300 अंक का इंटरव्यू होता है। अब यदि आपको सिविल सेवा परीक्षा में अपनी सफलता सुनिश्चित करनी है, तो एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए-मु&प्त65533;य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों में अधिक से अधिक स्कोर करना। इस परीक्षा में अंकों का ढेर होता है और यह आप पर निर्भर करता है कि इसमें से कितने अंक बटोर पाते हैं। आप मु&प्त65533;य परीक्षा में जितने ज्यादा अंक पाएंगे, उससे न केवल इस परीक्षा में आपकी सफलता पक्की होगी, बल्कि आप मेरिट लिस्ट में ऊपरी स्थान पाकर प्रॉपर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या समकक्ष कैडर के अधिकारी बन सकेंगे।
करें योजनाबद्ध प्रदर्शन
मु&प्त65533;य परीक्षा में प्रत्येक प्रश्नपत्र का महत्व होता है। क्वालिफाइंग नेचर के जनरल इंग्लिश और सामान्य हिन्दी की उपेक्षा इसलिए नहीं की जा सकती, क्योंकि इसमें पास होने के बाद ही आपके अन्य प्रश्नपत्रों के उत्तर पत्रकों की जांच की जाएगी। अन्य अनिवार्य एवं वैकल्पिक प्रश्नपत्रों का स्वरूप क्या है और उनमें कैसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं, आइए डालते हैं इस पर नजर : सामान्य अंग्रेजी व हिन्दी : क्वालिफाइंग नेचर के ये दोनों प्रश्नपत्र वैसे तो 300-300 अंक के होते हैं, लेकिन इनमें केवल आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक पाना होता है और इसके अंक वरीयता सूची बनाते समय नहीं जोड़े जाते। लेकिन इनमें उत्तीर्ण हुए अन्य प्रश्नपत्रों की कॉपियां नहीं चेक की जातीं, इसलिए इन्हें कभी भी हल्के से न लें और यह न सोचें कि इसमें पास होने के लिए पढ़ना जरूरी नहीं है। इस तरह की लापरवाही महंगी पड़ सकती है और आपका सपना पूरा होने से पहले ही खंडित हो सकता है। इन दोनों विषयों में सफलता के लिए पिछले वर्षो के पेपर्स देखकर और सिलेबस के अनुसार हिन्दी और अंग्रेजी ग्रामर की पुस्तक से नियमित अध्ययन और अ&प्त65533;यास करते रहें।
निबंध : निबंध से आपके अ&िप्त65533;ाव्यक्ति कौशल की परख की जाती है। 200 अंक के इस पेपर में कई विषयों में से किसी एक पर हिन्दी या अंग्रेजी में निबंध लिखना होता है। इसके लिए 3 घंटे का भरपूर समय होता है। इतना समय देखकर इस भ्रम में कभी न रहें कि इस पेपर में बहुत लिखना होगा। परीक्षा भवन में पेपर मिलने के बाद अपनी रुचि का विषय चुनें और लिखने से पहले रफ पेपर पर उसमें शामिल की जानी वाली बातों का खाका बना लें। आपका लेखन सारगर्भित हो, यानी विषय से भटकाव और दुहराव न हो। साथ ही, क्रमबद्धता का भी ध्यान रखें। वाक्य छोटे और भाषा सहज हो। तथ्य भरने की बजाय मौलिक विचार प्रस्तुत करने का प्रयास करें। सामान्य अध्ययन : इसके 300-300 अंक के दो पेपर होते हैं और विभिन्न विषयों (जनरल साइंस, करेंट इवेंट, हिस्ट्री, पॉलिटी, इकोनॉमी, मेंटल एबिलिटी, इंडियन नेशनल मूवमेंट आदि) पर असं&प्त65533;य लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होते हैं। अक्सर देखा जाता है कि परीक्षार्थी समय की कमी का रोना रोते हुए कई प्रश्न छोड़ देते हैं-खासकर 2 अंक वाले प्रश्न। इससे बचने के लिए शब्द सीमा का खास खयाल रखें और लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर अवश्य दें, क्योंकि इसमें पूरे अंक मिलने के चांस होते हैं। वैकल्पिक विषय : आपने जो भी वैकल्पिक विषय चुनें हैं, सभी में प्राय: एक निश्चित सं&प्त65533;या में प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। परीक्षा भवन में उत्तर लिखने से पहले उन प्रश्नों को चुन लें, जिनका आप सर्वश्रेष्ठ उत्तर दे सकते हैं। साथ ही, अपने उत्तर का एक ढांचा भी बना लें और उसी के अनुसार उत्तर लिखें। ध्यान रखें, उत्तर में प्रश्न के सभी पहलू समाहित हो जाए और कोई पक्ष छूटे नहीं। घड़ी देखकर सभी प्रश्नों पर एक समान समय दें, ताकि सभी उत्तरों में संतुलन बना रहे। अंत में थोड़ा समय बचाकर सभी उत्तरों पर सरसरी नजर जरूर डाल लें। यदि आप इन बातों पर अमल करते हैं, तो सभी पेपर्स में अधिकतम अंक हासिल कर न केवल अपनी सफलता सुनिश्चित करा सकते हैं, बल्कि टॉपर्स की लिस्ट में भी अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। पहले प्रयास में मु&प्त65533;य परीक्षा में असफल होने के बाद मुझे लगा कि मेरी प्लानिंग में कहीं कोई चूक रह गई है। अगली बार मैंने इस गलती को सुधार लिया और इसका परिणाम सामने है।
जुहेर बिन सगीर (पांचवां स्थान) सिविल सेवा परीक्षा-2005
मु&प्त65533;य परीक्षा में अंकों का विवरण विषय /प्रश्नपत्र कुल अंक अनिवार्य (केवल क्वालिफाइंग) इंडियन लैंग्वेजेज (सामान्य हिंदी) 300 सामान्य अंग्रेजी 300 अनिवार्य निबंध 200 सामान्य अध्ययन-1 300 सामान्य अध्ययन-2 300 कोई दो वैकल्पिक विषय, प्रत्येक विषय के दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 अंक का) (चार प्रश्नपत्र & 300) 1200 योग (सा. हिंदी व अंग्रेजी छोड़कर) 2000 साक्षात्कार 300 संपूर्ण योग 2300
5 टिप्स सफलता के
वैसे तो सिविल सेवा परीक्षा में मु&प्त65533;य चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के कुल योग के आधार पर तैयार मेरिट से ही होता है, लेकिन विशेषज्ञों की राय में यदि मु&प्त65533;य परीक्षा में उ&प्त65533;मीदवार अच्छा स्कोर कर ले और साक्षात्कार में बेशक उसे कुछ कम अंक प्राप्त हों, फिर भी उसके मेरिट में आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। आइए जानें, सफलता के लिए विशेषज्ञों के खास टिप्स:
इतिहास: जोड़ें घटनाक्रमों की कडि़यां
चूंकि इतिहास का सिलेबस विस्तृत है, इसलिए क्वैश्चन बैंक देखकर महत्वपूर्ण टॉपिक तैयार करें (सलेक्टिव स्टडी)।
दुनियाभर में अब तक जो बड़ी क्रांतियां हुई हैं, उनके बारे में खास तौर से पढ़ें। इससे आप उस समय की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था को भी समझ सकेंगे। इससे एक साथ कई सवाल तैयार हो जाएंगे।
इतिहास में घटनाओं की तारीखें बताने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कंटेंट, इसलिए घटनाओं की विषय-वस्तु और व्यवस्था पर पड़े उनके प्रभाव का अध्ययन कीजिए, केवल तारीखें न रटें।
यूपीएससी की परीक्षा में प्राचीन और मध्ययुगीन भारत के कुछ इलाकों को मानचित्र में दिखाने से जुड़े सवाल भी आते हैं। इनमें पूरे नंबर मिलते हैं, अत: मानचित्र भरने का नियमित अ&प्त65533;यास जरूरी है।
हर प्रश्न के लिए आपकी भाषा सहज और सरल हो। प्रश्नों के उत्तर बैलेंस होने चाहिए।
रतन लाल प्रवक्ता, इतिहास, हिंदू कॉलेज, डीयू पॉलिटिकल साइंस : समकालीन राजनीति पर ध्यान दें
समकालीन राजनीति व घटनाओं का तुलनात्मक अध्ययन करें।  राजनीतिक व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, विदेश नीति और भारत की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अच्छी तरह से समझें। ट्रेड, पॉलिटिकल इकोनॉमी और ग्लोबलाइजेशन को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में समझें।  मानवाधिकारों से संबंधित अवधारणाओं और दुनिया भर में मानवाधिकार हनन से जुड़े मुद्दों की स्टडी करें। साथ ही, यूनएओ की शांति प्रक्रिया और आज के समय में उसकी प्रासंगिकता से जुड़े टॉपिक्स भी तैयार करें।  भारतीय राजनीति पर जाति व अन्य सामाजिक व्यवस्थाओं के प्रभाव का अध्ययन करें। डॉ. मालती सुब्रमणियम प्रिंसिपल, दौलतराम कॉलेज, डीयू
टाइम मैनेजमेंट का रखें ध्यान
संभावित प्रश्नों के उत्तर को विजुअलाइज करें। जनरल स्टडीज में अच्छे स्कोर के लिए इसके दूसरे प्रश्नपत्र में अच्छा प्रदर्शन जरूरी है। सां&िप्त65533;यकी, इंडियन इकोनॉमी, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और दो अंकों वाले प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें। अंतिम समय में अध्ययन सामग्री के लिए ज्यादा न &प्त65533;ाटकें। अपने द्वारा पूर्व में जमा किए गए सोर्स मैटीरियल पर भरोसा रखें।  परीक्षा भवन में टाइम मैनेजमेंट का हर समय ध्यान रखें, ताकि सभी प्रश्नों का उत्तर लिखने में बराबर का समय दे सकें।  जिन प्रश्नों के उत्तर आप अच्छी तरह से दे सकते हैं, उन्हें पहले लिखें। प्रश्नों की क्रम सं&प्त65533;या को मेंटेन करना अनिवार्य नहीं है। पी. एस. रविंद्रन डायरेक्टर, बाजीराम एंड रवि, नई दिल्ली लिखने से पहले बनाएं उत्तर का फ्रेम
उत्तर लिखने से पहले प्रश्न और उसके स्कोप ऑफ इन्क्वायरी को अच्छी तरह से समझें।  अपने उत्तर के मेजर और माइनर प्वाइंट्स को वरीयता के आधार पर कटेगराइज करके लिखें । इन्ट्रोडक्शन में आपके पूरे उत्तर की रूपरेखा स्पष्ट होनी चाहिए, जबकि निष्कर्ष आपके जवाब का सार होता है। इसे ध्यान में रखकर ही अपने उत्तर को फ्रेम करें।  उत्तर की बाहरी साज-सज्जा, जैसे-कोटेशन या किसी हिस्से को अंडरलाइन करना-ऐसी बातें आपके उत्तर की अहमियत कम कर देती हैं। इन सब से दूर रहें।  उत्तर लिखते समय शब्द सीमा का हमेशा ध्यान रखें। तभी आप निश्चित समय में सभी प्रश्नों के जवाब लिख पाएंगे। उत्तरों को रिवाइज करने के लिए भी कुछ समय बचाने का प्रयत्न करें। वी.पी. गुप्ता, डायरेक्टर, राउज आईएएस, स्टडी सर्किल,नई दिल्ली
फिलॉसफी : तर्कशास्त्र व नीतिशास्त्र को अच्छी तरह पढ़ें
इंडियन और वेस्टर्न फिलॉसफी की विचारधाराओं का सूक्ष्म अध्ययन करें।  सिविल सेवा परीक्षा की दृष्टि से इंडियन फिलॉसफी बेहद महत्वपूर्ण है। खासतौर से इंडियन फिलॉसफी की जो 9 विचारधाराएं (स्कूल)हैं, उन्हें अच्छी तरह समझें। इनमें तीन जहां नास्तिक विचारधाराएं हैं-चार्वाक, बुद्घिज्म और जैनिज्म, वहीं 6 आस्तिक विचारधाराएं हैं-न्याय, वैशेषिक, सां&प्त65533;य, योग, मीमांसा और वेदांत। दर्शनशास्त्र के विभिन्न आयाम, जैसे-तत्व मीमांसा, ज्ञान अर्जन करने के साधन जैसे तत्वों पर पूरा ध्यान दें।  तर्कशास्त्र (लॉजिक) और नीति शास्त्र के सिद्घांतों को अच्छी तरह से पढ़ें।  आज के समय में दर्शनशास्त्र की उपयोगिता का सवाल तो जरूर तैयार करें। ऐसा करते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि जिस दर्शन की चर्चा कर रहे हैं, वह इस समय कितना प्रासंगिक है। डॉ. मनस्विनी योगी, रीडर-फिलॉसफी इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन, डीयू
सरल-सहज हिन्दी का ही प्रयोग करें
हिंदी साहित्य की प्रवृत्तियों, जैसे-काल : रीतिकाल, भक्तिकाल, छायावाद, प्रयोगवाद आदि का गहन अध्ययन करें। हिंदी साहित्य का इतिहास और उसकी अब तक की विकास यात्रा को बारीकी से समझें। कबीरदास, सूरदास, तुलसीदास, घनानंद, भारतेंदु हरिश्चंद्र के साथ प्रेमचंद, निराला आदि की रचनाओं का सूक्ष्म अध्ययन करें। रामचरित मानस सहित ऐसी कई रचनाएं हैं, जिनका साहित्यिक व सामाजिक महत्व है। इनका तुलनात्मक अध्ययन करें।  हिंदी में उत्तर लिखते समय अक्सर उ&प्त65533;मीदवार वाक्य व भाषा संबंधी अशुद्घियां करते हैं। इससे उनके अंक कटते हैं। इसलिए लिखने का भी अ&प्त65533;यास आवश्यक है। क्लिष्ट हिंदी के प्रयोग से बचें, सरल-सहज हिंदी का ही प्रयोग करें। डॉ. रमेश शर्मा, प्रिंसिपल व एक्सपर्ट, मोतीलाल नेहरू कॉलेज
सोशियोलॉजी : जरूरी है तुलनात्मक अध्ययन
सोशियोलॉजी यानी समाजशास्त्र एक इंटरडिस्पिलनरी सब्जेक्ट है, इसलिए अपने उत्तरों में आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक पहलुओं को भी अवश्य शामिल करें। जाति, परिवार, राजतंत्र व सत्ता किसी भी व्यवस्था के आधार हैं। सोशियोलॉजी ऑफ इंडिया हो या फिर दूसरे देशों के साथ तुलनात्मक अध्ययन, इनसे संबंधित प्रमुख तत्वों को बारीकी से समझें। सिद्घांत और विचारक के बीच अंतर्सबंध होता है, इसलिए कार्ल मा‌र्क्स, वेबर या फिर किसी भी विचारक के सिद्घांतों को समझने के लिए विचारकों की जीवन शैली व अन्य बातों पर भी जरूर गौर करें।  कई बार दो विचारकों के सिद्घांत अलग-अलग होने के बावजूद उनमें कुछ न कुछ समानता होती है, इसलिए जिस थ्योरी में आप ओवरलैपिंग पाएं, उसका तुलनात्मक अध्ययन करें। इससे आपको सिद्घांत अच्छी तरह स्पष्ट हो जाएगा। सवालों के जवाब लिखते समय पूछे गए टॉपिक की सामान्य अवधारणा समझाएं और फिर प्रश्नानुसार अपने उत्तर को विकसित करें। उत्तर में क्रमबद्धता का ध्यान रखें और सरल-सहज भाषा का प्रयोग करें।ह्व डॉ. दिनाज मीरचंदानी हेड, डिपार्टमेंट ऑफ सोशियोलॉजी, मिरांडा हाउस, दिल्ली वि.वि.
उत्तर की भाषा हो सहज-सरल
किसी भी विषय के प्रश्न का उत्तर लिखते समय शब्द सीमा का उल्लंघन कतई न करें, विशेषकर लघु-उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर में।  उत्तर लिखते हुए संबंधित पारिभाषिक शब्दावली का उल्लेख करें।  किसी भी प्रश्न का उत्तर लिखने से पहले एक से दो मिनट में रफ पृष्ठ पर उत्तर की रूपरेखा बना लें और फिर इसके आधार पर लिखना आरंभ करें।  उत्तर में अनावश्यक रूप से कठिन शब्दों का प्रयोग न करें, सरल तथा सुबोध शब्दों का ही प्रयोग करें।  उत्तर में सबसे अधिक महत्व वैचारिक स्पष्टता और भाषागत प्रवाह का होता है, इसे विकसित करें। टिप्पणी : किसी भी प्रश्न का उत्तर लिखते समय अनावश्यक जल्दबाजी न दिखाएं। चूंकि यह आपके उज्ज्वल करियर का सवाल है, इसलिए प्रत्येक उत्तर बेहद सजग होकर लिखें। यदि सभी उत्तरों में संतुलन बना रहे, तो बेहतर औसत अंक हासिल कर इस परीक्षा में सफल होना संभव है। विकास दिव्यकीर्ति, अकादमिक निदेशक, दृष्टि, दिल्ली
समझें प्रश्न की मांग
प्रश्न की मांग के अनुरूप ही अपना उत्तर लिखें। इसके लिए सबसे पहले प्रश्न को अच्छी तरह से समझने का प्रयास करें। टाइम मैनेजमेंट करते हुए प्रत्येक उत्तर के लिए समय का निर्धारण पहले से कर लें, ताकि सभी पर समान रूप से ध्यान दे सकें और कोई उत्तर अधूरा-अपूर्ण न रहे।  यदि संभव हो सके, तो उत्तर के साथ रेखाचित्र भी दें, ताकि उत्तर में और अधिक स्पष्टता आ सके। इससे परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। अपने उत्तर में क्रमबद्धता बनाए रखें। इधर-उधर भटकें नहीं। इससे बचने के लिए उत्तर लिखने से पूर्व इसका पूरा खाका बना लें।  सभी उत्तरों में शब्द सीमा पर विशेष ध्यान दें। सी.बी.पी. श्रीवास्तव, निदेशक, डिस्कवरी, दिल्ली
लेखन में झलके मौलिकता
उत्तर लिखते समय विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाएं, तथ्यों को हॉवी न होने दें, बल्कि इनका उपयोग जरूरी होने पर ही करें।  लेखन में क्रमबद्धता बनाएं रखें। आपका उत्तर नियोजित और प्रश्न की मांग के अनुरूप हो।  लेखन में आपकी मौलिकता झलकनी चाहिए। स्पष्ट रूप से कहें, तो किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर अपनी मौलिक लेखन क्षमता विकसित करें। आपकी भाषा प्रवाहपूर्ण हो। यह ऐसी हो, जिससे आपकी बात स्पष्ट रूप से सामने आ सके। भाषा में पर्याप्त संप्रेषणीयता होनी चाहिए। अलंकृत भाषा से भी परहेज करें। प्रश्नों का चुनाव भी परीक्षा भवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है। पहले आपको उन प्रश्नों का उत्तर लिखना चाहिए, जिन पर अपना सर्वाधिक नियंत्रण महसूस करते हैं और फिर घटते हुए क्रम में अन्य प्रश्नों की ओर बढ़ें।

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