नायक से महानायक बनने का सफरनामा

अब न तो वह यंग हैं और न ही एंग्री, लेकिन दर्शकों और एडवर्टाइजमेंट कंपनीज के बीच आज उनकी पहले से भी ज्यादा डिमांड है। आज की युवा पीढ़ी अमिताभ को बागबां और बाबुल के रूप में जानती है, उस सैम के रूप में जानती है जो अपने बेटे के सामने लड़की से फ्लर्ट कर सकता है। उस शेफ के रूप में जानती है जिसकी जिंदगी में चीनी कम है और इस फिल्म में आप 60 साल से ज्यादा के अमिताभ और उनसे आधी उम्र की तब्बू के बीच की केमिस्ट्री देख सकते हैं। अमिताभ की फिल्में आज भी बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन ओपनिंग की गारंटी होती हैं।

11 अक्टूबर 1942 को जब वह पैदा हुआ तो पिता नाम रखना चाहते थे इन्कलाब, लेकिन कवि सुमित्रानंदन पंत ने नाम रखा अमिताभ, यानी जिसकी आभा अमित हो, कभी न मिटने वाली हो। नाम के मुताबिक ही अमिताभ बच्चन की चमक आज भी उसी तरह बरकरार है, जैसे मिड-70 में उभरी थी।

भारतीय सिनेमा में धूमकेतु की तरह चमके इस सितारे ने बाकी सभी सितारों की चमक फीकी कर दी। सितारे आते गए, ब्लैक होल में समाते गए, लेकिन फिल्म आकाश पर 73 में चमका यह सितारा आज भी चमक रहा है, हां उसकी रोशनी कुछ जुदा सी जरूर है।

1973 में रिलीज हुई प्रकाश मेहरा की जंजीर ने दुबले-पतले, भारी आवाज वाले इस एक्टर को अमिताभ बच्चन बना दिया। 1975 में रिलीज हुई दीवार से एंग्री यंगमैन की इमेज और पुख्ता हुई। इमरजेंसी, शोले और बॉबी के दौर में आई इस फिल्म में लोगों को अमिताभ के रूप में एक ऐसा नायक मिला जो उनकी भड़ास, युवा पीढ़ी के आक्रोश को परदे पर निकालने का माद्दा रखता था। इसके बाद अमिताभ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिस पर्सनैलिटी, आवाज, टेढ़ी आंखों के लिए उन्हें कभी खारिज कर दिया गया था, वही अमिताभ की यूएसपी बन गईं। डॉन, त्रिशूल, काला पत्थर में एंग्री यंग मैन थे, तो मिली, अभिमान, बेमिसाल में उन्होंने अपने कैरेक्टर को नए आयाम भी दिए। अमर-अकबर-एंथनी, याराना, शराबी में कॉमेडी में भी सबको पीछे छोड़ दिया।

भारतीय सिनेमा में दिलीप कुमार के बाद वह दूसरे इन्टेंस एक्टर हैं, उनकी शुरू की हिट फिल्मों में उन पर गाने नहीं फिल्माए गए, और बकौल अमिताभ (एक मैग्जीन को दिए गए इंटरव्यू के मुताबिक) शशि कपूर उनकी फेवरिट हीरोइन थी।

मोहब्बतें का नारायण शंकर (अमिताभ) गुरुकुल को बदल डालने को आतुर राज आर्यन (शाहरुख खान) से कहते हैं कि वह किसी भी किस्म के बदलाव के खिलाफ हैं। लेकिन खुद अमिताभ ने बड़ी खूबसूरती से रील लाइफ पर चोला बदल लिया। दीवार में शर्ट पर नॉट लगाने वाले अमिताभ अब झूम-बराबर-झूम में कलरफुल ओवरकोट में लैटिनो सिंगर बनकर झूमते हैं।

विडंबना : >> फिल्म दीवार के लिए शशि कपूर को बेस्ट सपोर्टिग एक्टर का फिल्म फेयर मिला, लेकिन अमिताभ बच्चन को कोई अवार्ड नहीं मिला।

>> शक्ति, एक ऐसी फिल्म जिसमें बाप-बेटे के कनफ्लिक्ट को बेहतरीन ढंग से दिखाया गया है। दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन में जबरदस्त टकराव। हालांकि दोनों ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया, लेकिन कहा जाता है कि दोनों के बीच का द्वंद्व इतना जबरदस्त था, कि फिल्म की थीम की विश्वसनीयता और बढ़ गई।

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