टीम इंडिया को पूर्णकालिक कोच की दरकार

पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि इससे पहले कप्तानी का बोझ महेंद्र सिंह धोनी को प्रभावित करे टीम इंडिया के लिए एक पूर्णकालीक कोच की नियुक्ति होनी चाहिए। धोनी को इंग्लैंड दौरे के बाद द्रविड़ के अचानक कप्तानी छोड़ दिए जाने के बाद तुरत-फुरत कप्तान बनाया गया था। भारतीय टीम में कोच का पद ग्रेग चैपल के विश्वकप में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद विदा होने के समय से ही खाली पड़ा है।

हालांकि अपना दूसरा ही पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट सत्र खेलते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करिश्माई नेतृत्व के चलते भारतीय क्रिकेट में नई बयार का प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए भारत को पहले ट्वंटी20 विश्वकप में जीत दिलाई। लेकिन विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले तीन मैचों में ही सारा उत्साह काफूर हो गया है। हालांकि भारत ने सीरीज में 2-0 से पीछे होने के बाद चंडीगढ़ में चौंथा मैच जीतकर सीरीज में वापसी की है। धोनी का आत्मविश्वास देखते हुए उन्हें टेस्ट मैचों में भी कप्तान बनाया जा सकता है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और कोच अंशुमन गायकवाड़ ने कहा है कि कोच के होने से धोनी को कप्तानी का बोझ उठाने में आसानी होती। भारतीय टीम की कप्तान को मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह यह 24 घंटे इस पद का तनाव झेलना पड़ता है। ऐसे में कोच काफी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस पद से जुड़े तनाव को द्रविड़ के शब्दों में समझा जा सकता है। उन्होंने कप्तानी छोड़ते हुए कहा था कि भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व करना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है।

इसके बाद भी बोर्ड कोच की घोषणा करने में देरी कर रहा है। खुद टीम के उप कप्तान युवराज सिंह भी कह चुके हैं कि बोर्ड को नए कोच को नियुक्त करने में देरी नहीं करना चाहिए।

पूर्व टेस्ट खिलाड़ी बिशन सिंह बेदी ने कहा कि बोर्ड की आदत रही है कि वह कप्तान नियुक्त कर सबकुछ उसी पर छोड़ देता है। धोनी एक बेहतर कप्तान है। उसे इन सबसे बचाया जाना चाहिए। उसकी सफलता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

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