जर्मनी के गरहार्ड अर्ल को कैमिस्ट्री में नोबेल

जर्मनी के गरहार्ड अर्ल को कैमिस्ट्री के लिए 2007 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। गरहार्ड ने सॉलिड सरफेस पर कैमिकल रिएक्शन्स के बारे में अध्ययन किया और उनके द्वारा की गई इस खोज के कारण ओजोन लेयर के पतला होने के बारे में उठे सवालों पर रौशनी डाली जा सकेगी।

अर्ल के शोध ने आधुनिक सरफेस कैमिस्ट्री की नींव डाली है। इससे फ्यूल सैल्स के काम करने, कैटेलिटिक कन्वर्टर्स के द्वारा कार के एग्जॉस्ट को साफ करने और यहां तक कि लोहे में ज़ंग लगने जैसे सवालों के जवाब खोजे जा सकते हैं। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने अर्ल के शोध के बारे में यह टिप्पणी की है।

बुधवार को उन्हें नोबेल दिए जाने की घोषणा के साथ ही अर्ल 71 साल के हो गए हैं। अर्ल ने रिपोर्टर्स को बताया कि उनके लिए उनके जन्मदिन पर यह सबसे बड़ा तोहफा है। 1988 के बाद अर्ल पहले जर्मन हैं जिन्हें कैमिस्ट्री में नोबेल से नवाजा गया है। उनका शोध एकेडमिक कामों के अलावा इंडस्ट्रियल विकास दोनों तरीकों से उपयोगी साबित हुआ है।

गरहार्ड अर्ल ने यह पता लगाने में सफलता पाई है कि कैसे किसी सतह पर रासायनिक प्रक्रियाएं होती हैं और इस तरह उन्होंने रसायन विज्ञान में एक नई धारा सरफेस कैमिस्ट्री को ही जन्म दे दि्या। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने अर्ल के इस शोध को काफी अहमियत दी है जिसमें हवा से नाइट्रोजन निकाली जाती है और इसका कृत्रिम कीटनाशकों को तैयार करने में लोहे की मदद से इस्तेमाल किया जा सकता है।

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